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नागा साधुओं की तरह कुंभ क्यों नहीं आते हैं अघोरी, जानिए दोनों की रहस्यमयी दुनिया का सच

नागा साधुओं की एक खास बात है कि वो किसी न किसी अखाड़े से जुड़े होते हैं, जबकि अघोरी साधुओं का कोई अखाड़ा नहीं होता है। नागा और अघोरी दोनों को ही साधु बनने के लिए कठोर परीक्षा देनी पड़ती है, जिसमें कम से कम 12 साल का समय लगता है। इनमें नागा साधुओं की परीक्षा उनके अखाड़ों में होती है, जबकि अघोरी साधुओं को अघोरी बनने के लिए श्मशान में तपस्या करनी पड़ती है। अघोरी साधु श्मशान में किसी मुर्दे के ऊपर बैठकर या फिर मुर्दे के पास बैठकर कठोर तपस्या करते हैं।  

आमतौर पर नागा साधु निर्वस्त्र ही रहते हैं, लेकिन कुछ-कुछ नागा साधु गेरुआ वस्त्र पहने रहते हैं। चाहे कितनी भी गर्मी हो, सर्दी हो, वो वैसे ही रहते हैं। वहीं, अघोरी साधुओं के बारे में कहा जाता है कि वो जानवर के खाल से अपना तन ढंके रहते हैं।  

नागा और अघोरी साधु दोनों में ये समानता जरूर है कि दोनों ही मांस खाते हैं। हालांकि नागा साधुओं में कुछ शाकाहारी भी होते हैं, लेकिन अघोरी साधु कभी भी शाकाहारी नहीं होते। कहा जाता है कि ये लोग ना केवल जानवरों का बल्कि इंसानों का मांस भी खाते हैं। ये मुर्दे के मांस का सेवन भी करते हैं। 

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आमतौर पर नागा और अघोरी साधु दोनों ही दुनिया की भीड़ से बिल्कुल अलग रहते हैं। नागा साधुओं के बारे में कहा जाता है कि वो अपना पूरा जीवन जंगल या पहाड़ों पर बिताते हैं, जबकि अघोरी साधु कभी भी श्मशान से बाहर नहीं आते हैं। ये लोग या तो श्मशान में रहते हैं या फिर एक ऐसी जगह पर रहते हैं, जहां आसपास भी कोई ना आता हो।

नागा साधुओं के बारे में कहा जाता है कि उनके पास रहस्यमयी ताकत होती है और ये ताकत वो कठोर तपस्या करके हासिल करते हैं। इनका इस्तेमाल वह लोगों की समस्याओं के निवारण के लिए करते हैं। वहीं, अघोरी साधु तांत्रिक साधनाओं के लिए जाने जाते हैं। कहते हैं कि उनके पास भी रहस्यमयी शक्तियां होती हैं। हालांकि वो तंत्र-मंत्र के माध्यम से लोगों की परेशानियों का हल निकालने के लिए जाने जाते हैं।  

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