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हिमालय में दिखा हिम मानव ! जानिए हिम मानवों का इतिहास

भारतीय सेना को हिमालय में 32 इंच लंबे और 15 इंच चौड़े निशान मिले हैं। माना जा रहा है कि ये हिममानव या येति के हो सकते हैं, जिनका जिक्र पौराणिक कथाओं में किया जाता रहा है। सेना की ओर से बर्फ पर मिले इन निशानों की तस्वीरें ट्विटर अकाउंट पर शेयर कीं। आर्मी के मुताबिक, ये रहस्यमयी निशान 9 अप्रैल को सेना को मकालू बेस कैंप पर 5250 मीटर की ऊंचाई के पास नजर आए थे। पहले भी नेपाल के मकालू-बरुन नेशनल पार्क में हिम मानव की मौजूदगी के दावे किए जा चुके हैं। 

हिम मानव का रहस्य

ऐसा कहा जाता है कि हिम मानव का रहस्य करीब 900 साल पुराना है। इसके आकार, आकृति को लेकर अलग-अलग किस्से और कहानियां हैं, लेकिन ये असल में किसी को नहीं पता कि यह हैं कैसे ? लद्दाख में कुछ बौद्ध मठों ने हिममानव को देखने के दावे किए थे। इसके अलावा नेपाल और तिब्बत के हिमालय में इसे देखे जाने का दावा किया जा चुका है। कहा जाता है कि यह विशाल वानर जैसा होता है, जिसके पूरे शरीर में बाल होते हैं और जो बंदर की तरह दिखता है लेकिन इंसानों की तरह दो पैरों पर चल सकता है। बताया जाता है कि यह हिमालय की गुफाओं और कंदराओं में रहते हैं।

कई लोगों ने किए दावे

सबसे पहले हिम मानव के बारे में 1832 में बंगाल की एशियाटिक सोसायटी के जर्नल में एक पर्वतारोही बीएच होजशन ने जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि जब वह हिमालय में ट्रेकिंग कर रहे थे तब उनके गाइड ने एक विशालकाय प्राणी को देखा। जो इंसानों की तरह दो पैरों पर चल रहा था। जिसके शरीर पर घने लंबे बाल थे।

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हिम मानव हिमालयी सभ्यता के हिस्से जैसे हैं। लेकिन हिम मानव के होने का दावा तब पुख्ता होता है, जब एक ब्रिटिश फोटोग्राफर एरिक शिप्टन ने उसे देखने का वादा किया। दरअसल, जब 1951 में ब्रिटिश खोजी एरिक शिप्टन माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए प्रचलित रास्ते से अलग एक रास्ते की तलाश कर रहे थे तो उन्हें बहुत बड़े-बड़े पैरों के निशान दिखे। उन्होंने इन निशानों की तस्वीरें ले लीं और यहीं से शुरु हुई, आधुनिक युग में हिम मानव के रहस्य की चर्चा।

एरिक ने ये तस्वीरें पश्चिमी एवरेस्ट के मेन लोंग ग्लेशियर पर खींची थीं। पैरों के ये निशान करीब 13 इंच लंबे थे और इसे अब तक हिमालय पर ली गई तस्वीरों में सबसे रोचक तस्वीरों में गिना जाता है। हालांकि अभी भारतीय सेना ने जिन पैरों के निशान देखे हैं वे इससे कहीं ज्यादा बड़े हैं। इसके बाद यह उस दौर का इतना बड़ा मुद्दा बना कि नेपाल की सरकार ने हिम मानव की खोज के लिए 1950 के दशक में लाइसेंस जारी किए। जाहिर सी बात है, एक भी हिम मानव खोजा नहीं जा सका।

अब तक कुछ साबित नहीं हुआ

जिसके बाद कई लोग यह मानने लगे कि यह कोई साधारण काला भालू रहा होगा लेकिन पैरों के निशान देखकर कई लोग इसे हिम मानव ही मानते रहे। इसके बाद से हिम मानव को देखने के कई मामले सामने आए और कई खोजियों और शेरपाओं ने पैरों के निशान देखने का दावा किया लेकिन कुछ भी पुख्ता साबित नहीं किया जा सका।

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